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अंगूर की खेती कैसे करे Grape Farming, Cultivation Information Hindi

Last updated on July 9th, 2024 at 10:59 am

अंगूर की खेती कैसे करे Grape Farming, Cultivation Information Hindi | Grape Farming Business Hindi

किसान अपने खेत में बोई फसलों की अच्छी पैदावार के लिए कई प्रयास करता है, ताकि वह  फसल की उपज से बेहतर मुनाफ़ा कमा सके | इसी कड़ी में किसान सब्जी और फूल की खेती के साथ अंगूर की खेती भी कर सकते हैं | अंगूर की बागवानी लगभग पूरे भारत में बहुत से क्षेत्रों में की जा सकती है |

आज के समय फलों की मांग दिनों-दिन बढ़ती जा रही है, अंगूर को फलों मे सबसे ज्यादा बिकने वाले फलों की श्रेणी मे गिना जाता है | एक एकड़ में अंगूर की खेती से हर साल लगभग  इतना मुनाफ़ा हो सकता है जिस से अगर खेती पर होने वाले खर्च को भी निकाल दें, तब भी किसानों को काफी बेहतर मुनाफ़ा मिल सकेगा |

आज महाराष्ट्र में सबसे अधिक क्षेत्र में अंगूर की खेती की जाती है तथा उत्पादन की दृष्टि से यह देश में अग्रणी है।भारत में अंगूर की उत्पादकता Grapes Crop पूरे विश्व में सर्वोच्च है।

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अंगूर फल के स्वास्थ्य लाभ : Grape Farming Business Hindi

Health benefits of Grape Fruit :- मीठे रसीले फलों में शामिल अंगूर ऐसा फल है, जो आमतौर पर सभी को पसंद आता है:

  • कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोके
  • हार्ट अटैक के खतरे को करे कम
  • डायबिटीज में फायदेमंद
  • तुरंत थकान दूर कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
  • फाइबर की मात्रा अधिक होने से काफी समय तक भूख महसूस नहीं होती।
  • कब्ज की शिकायत करे दूर Grape Farming Business Hindi
  • आंखों के लिए फायदेमंद

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अंगूर की खेती कब और कैसे होती है:

When and how Grapes are cultivated :- अंगूर की खेती करने वाले किसान भाइयों और बहनों से निवेदन है की ज्यादा मुनाफे कमाने वाली फसलों को नई तकनीक और पूर्ण जानकारी के साथ ही करें | अंगूर की फसल साल में एक बार ही आती है और फूल आने से लेकर फल-फसल तैयार होने में करीब 110 दिन लगते हैं|

अंगूर की खेती करने के लिए खेत की तैयारी से लेकर बीज का चुनाव , रोग किट दवा , देखरेख-सावधानी आदि को ध्यान मे रखकर करें | अगर आपको अंगूर की खेती के सम्बन्ध में कोई ज्यादा जानकारी न है तो आप इस से related जानकारी को समझे उसके बाद ही अंगूर की खेती  करें | क्योंकि किसी भी काम को करने से पहले उसका पूर्ण ज्ञान होना अति आवश्यक है |

उपयुक्त जलवायु और भूमि का चयन :

Selection of suitable climate and land :- अंगूर की खेती के लिए मौसम गर्म, अर्धशुष्क तथा दीर्घ ग्रीष्म ऋतु वाला अनुकूल रहता है I लेकिन बहुत अधिक तापमान अंगूर की खेती को नुकसान पहुंचा सकता है | 25 से 30 डिग्री तक का तापमान उत्तम माना जाता है | दुनियाभर में लगभग 10 अंगूर उत्पादक देश हैं, जिनमें भारत का नाम भी शामिल है |

अंगूर की खेती या बागवानी के लिए मिट्टी की बात करें तो लगभग सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है | अंगूर की जड़ की सरंचना लंबी और जमाव मजबूत होता है इसलिए कंकरीली, रेतीली से चिकनी तथा उथली के अलावा गहरी मिट्टियों में भी अच्छी पकड़ बना लेता है |

जहाँ पर आप अंगूर की खेती करना चाहते है अगर वहाँ जल निकासी अच्छी हो तो रेतीली , दोमट मिट्टी में भी अंगूर की खेती हो सकती है | किसान फसल की ड्रिप सिंचाई करें, तो पानी की बचत भी की जा सकती है |

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अंगूर की प्रजाति / उन्नत किस्में :

Grapes Varieties / Improved Varieties :- देश मे अंगूर की किस्मो / वैराइटियों के विकास व विस्तार में भारतीय कृषि अनुसंधान संसथान, नई दिल्ली का विशेष योगदान रहा है |अंगूर की उन्नत किस्में निम्न है –

  • अनब-ए-शाही
  • बंगलौर ब्लू
  • भोकरी
  • गुलाबी
  • काली शाहबी
  • परलेटी
  • थॉम्पसन सीडलेस
  • शरद सीडलेस

अंगूर की किस्म जिसकी विदेशों में मांग है :

Variety of Grapes that are in demand abroad :- बागवानी जानकारों का कहना है कि अंगूर की फसल साल में एक बार ही आती है | इस फसल को तैयार होने में लगभग 110 दिन का समय लगता है | अगर एक एकड़ खेत में अंगूर की पैदावार की बात करें , तो लगभग 1200 से 1300 किलो अंगूर प्राप्त हो जाते हैं | बता दें कि हमारे देश से विदेशों में अंगूर की थामसन किस्म की मांग बनी रहती है|

बाग में बाड़ लगाकर खेती :

Farming by fencing in the garden :- अंगूर की खेती को बाग में बाड़ लगाकर करनी चाहिए | इस तरह इसकी पैदावार अच्छी होती है | आप चाहे तो अपने बाग में लोहे के एंगल या लकड़ी के बांस पर जाल तैयार कर सकता है | बाग में बाड़ को तैयार करने के बाद लाइन से अंगूर के पौधे लगाएं |  इन लाइन से लाइन की दूरी लगभग 9 फीट की होनी चाहिए |

इसके साथ ही एक पौधे से दूसरे पौधे की दूरी लगभग 5 फीट की रखें | इस तरह पौधे बांस या लोहे के एंगल के सहारे से ऊपर चढ़कर तारों के जाल पर फैल जाते हैं | ध्यान दें कि पौधों की कटिंग साल में 2 बार कर देनी चाहिए |  इसकी खेती शुरू करने से पहले बागवानी विशेषज्ञ से इसकी सारी अहम जानकारियां ले लेनी चाहिए | क्योंकि किसी भी काम को करने से पहले उसका पूर्ण ज्ञान होना अति आवश्यक है |

अंगूर की बेल की कटाई :

Grape Vine Harvesting :- अंगूर की खेती हेतु अंगूर की बेल की कटिंग प्रवर्धन मुख्यत कटिंग कलम द्वारा होता है | जनवरी माह में काट छांट से निकली टहनीयो से कलमे ली जाती है | कलमे सदैव तैयार हो चुके पौधों की टहनीयो से ही ली जाने चाहिए |

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अंगूर का पौधा कैसे लगाएं- गड्ढे की तैयारी :

How to plant grapes :- अंगूर की बागवानी के लिए गड्ढे को करीब 50*50*50 सेमी आकार में खोदकर तैयार करते है और तैयार करने के बाद एक सप्ताह के लिए खुला छोड़ दे | अंगूर का पौधा लगाते समय निचे लिखे गयी सारी सामग्री को दिए गये माप के अनुसार मिलाकर सभी गड्ढे भर दें |

  • सडी गोबर की खाद (15-18 किलोग्राम),
  • 250 ग्राम नीम की खली ,
  • 50 ग्राम सुपर फॉस्फेट
  • 100 ग्राम पोटेशियेम सल्फेट

अंगूर की कलम :-

Grape Pen :- अंगूर की बेल लगाने के 6 महीनों बाद एक-डेढ़ फूट की दूरी पर पौधे को कट कर देते है, जिससे फुटाव ज्यादा अच्छे तरीके से हो जाए | एक साल में पौधा पूरी तरह से तैयार हो जाता है | अंगूर का प्रवर्धन मुख्यत: कटिंग कलम द्वारा होता है। जनवरी माह में काट छांट से निकली टहनियों से कलमेें ली जाती हैं।

कलमें सदैव स्वस्थ एवं परिपक्व टहनियों से ली जाने चाहिए। सामान्यत: 4 – 6 गांठों वाली 23 – 45 से.मी. लम्बी कलमें ली जाती हैं। कलम बनाते समय यह ध्यान रखें कि कलम का नीचे का कट गांठ के ठीक नीचे होना चाहिए एवं ऊपर का कट तिरछा होना चाहिए। एक वर्ष पुरानी जडय़ुक्त कलमों को जनवरी माह में नर्सरी से निकाल कर बगीचे में रोपित किया जा सकता है।

अंगूर की खेती मे खाद की मात्रा :

Quantity of manure in grape cultivation :- अंगूर की फसल को अनेक प्रकार के पोषक तत्वों की जरूरत होती है, इसलिए नियमित और संतुलित मात्रा मे खाद-उर्वरक का प्रयोग करें | इस खेती मे मुख्य रूप से फसल को खाद जड़ों मे गड्ढे बनाकर उर्वरक दिया जाता है और उसे मिट्टी से ढक दिया जाता है |अंगूर की बेल मे रोग-कीटों से बचानेके लिए मुख्य रूप से दवाई की स्प्रे करें या कोई जड़ में कोई दवाई डालें |

अंगूर की 4 से 5 वर्ष पुरानी बेलो में अच्छे उत्पादन के हिसाब से 500 -500 ग्राम Nitrogen , Muriate of Potash , Potassium Sulfate समान मात्रा मे और जैविक खाद के रूप मे 50 – 60 कि. ग्रा. गोबर की पक्की हुई खाद का प्रयोग कर सकते है |

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अंगूर की सिंचाई  :

Irrigation in Grapes :- अंगूर की खेती देश के अर्धशुष्क क्षेत्रों मे की जाती है इसलिए इस खेती मे समय-समय से सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है | अंगूर की फसल मे पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए 7-8 दिनों मे एक सिंचाई करें और मौसम के आवश्यकतानुसार सिंचाई करे | ज्यादातर देश मे आजकल अंगूर की फसल मे किसान Drip Irrigation System का इस्तेमाल करते हैं, जिस से पानी की बचत के साथ साथ और भी अनेक प्रकार के फायदे है |

अंगूर की बेल की देखभाल कैसे करें ( Grape Vine Care ) :

  • उत्तरी भारत में अधिकतर अंगूर की बेलों पर बरसात के आरम्भ होते ही White-Churnile Disease ओर Sarcospora Spot Disease का असर शुरू होता है, इसलिए सचेत रहे उचित दवा का प्रयोग करें |
  • अंगूर की कलम कटाई जनवरी के प्रथम सप्ताह में कटाई-छंटाई का काम पूरा कर देना चाहिए |
  • कटाई-छंटाई का काम पूरा करने तुरंत बाद बेलों पर डॉर्मेक्स या डरब्रेक (30 ए आई) का 1.5% घोल का छिड़काव करें , जिससे फूल आकर पकने में करीब दो सप्ताह जल्दी तैयार हो जाते है  है |
  • Grape  की बेल में वृद्धि नही हो रही है, ग्रोथ रुक गई है, पत्ते भी मुड़ने लगे हैं तो -200 ग्राम सुपर फोस्फेट और 100 ग्राम यूरिया का प्रयोग प्रति बेल के साथ देवे |
  • अंगूर की बेल की कटिंग के समय विशेष ध्यान रखे 15 डिग्री के एंगल मे स्टील के चाकू या इलेक्ट्रिक केची से काटे, फसल को हर प्रकार से फायदा होगा | Grape Farming Business Hindi
  • अंगूर के पकते समय बारिश या बादल का होना बहुत हानिकारक है क्योंकि इस स्थति मे अंगूर के फल फट जाते हैं |
  • Grape  को पकाने की बहुत ही कम आवश्यकता पड़ती है क्योंकि ये थोड़े कच्चे अवस्था मे बाजार-मंडियों मे भेजे जाते है | और वैसे अंगूर पकाने के लिए दवा- कार्बाइड, एथलिक, या हवा रहित वातावरण देकर भी अंगूर को पका सकते है |
  • अंगूर के फल बहुत छोटे आकार में है तो इसके लिए IFFCO की सांगरिका दवाई के इस्तेमाल से इनका आकार बड़ा हो सकता है |
  • Grape  की बेलों-बगीचों मे पानी अधिक समय तक भराव रहना इसकी बागवानी के लिए बहुत हानिकारक होता है |
  • बरसात जल निकासी की उत्तम व्यवस्था के लिए जून माह में जल निकास नालिया तैयार कर लेनी चाहिए |

अंगूर की खेती से पैदावार : Grape Farming Business Hindi

Yields from grape cultivation :- पैदावार की बात करें तो देश में अंगूर की ओसत पैदावार 30 टन प्रति हैक्टेयर है | वैसे तो पैदावार अंगूर की क़िस्म, मिट्टी और जलवायु, खेती की तकनीकों पर निर्भर होती है | सामान्य रूप से खेती की विधियों मे एक एकड़ में करीब 1200-1300 किलो अंगूर पैदावार हो जाती है |

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अंगूर की खेती सबसे ज्यादा कहाँ होती है :

Where grapes are grown the most :- भारत के महाराष्ट्र राज्य में अंगूरों का सबसे ज्यादा उत्पादन लिया जाता है |  पिछले दशक में उत्तर भारत में अंगूर के उत्पादन क्षेत्रों में गिरावट देखी गई जिसके कई कारण रहें है जैसे की  – प्रदूषण, जलवायु, मिट्टी और फसल मे कुपोषण एवं सूक्ष्म तत्वों की कमी, बढ़ते रोग किट समस्या आदि | Grape Farming Business Hindi

देश मे उत्पादन के आधार पर –

दक्षिणी भारत के कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु मुख्य राज्य प्रमुख है |
उत्तर भारत में पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर-प्रदेश, राजस्थान व दिल्ली राज्यो में अंगूर की खेती हो रही रही है I

अंगूर की खेती से संबंधित प्रश्न : Grape Farming Business Hindi

प्रश्न :- अंगूर कितने दिन में लगते हैं?
उत्तर :- अंगूर की फसल मे फूल आने से लेकर फल-फसल तैयार होने में करीब 100 से 110 मे दिन लगते हैं |

प्रश्न :- अंगूर की बेल कब लगाई जाती है?
उत्तर :-Angoor ki kheti मे अंगूर की कलम कटाई के लिए- जनवरी के प्रथम सप्ताह में कटाई-छंटाई का काम पूरा कर देना चाहिए |

प्रश्न :- अंगूर की बेल में कौन सी खाद डालें?
उत्तर :-Angoor ki kheti मे बेल में वृद्धि नही हो रही है, ग्रोथ रुक गई है, पत्ते भी मुड़ने लगे हैं तो -200 ग्राम सुपर फोस्फेट और 100 ग्राम यूरिया का प्रयोग प्रति बेल के साथ देवे |

प्रश्न :- अंगूर की बेल की कटाई कैसे करें?
उत्तर :-अंगूर की बेल लगाने के 6 महीनों बाद एक-डेढ़ फूट की दूरी पर पौधे को कट कर देते है, जिससे फुटाव अच्छे तरीके से हो जाए | एक साल में पौधा पूरी तरह से तैयार हो जाता है |

प्रश्न :- काले अंगूर पकाने के लिए कौन सी दवा है ?
उत्तर :-अंगूर पकाने के लिए दवा- कार्बाइड, एथलिक, या हवा रहित वातावरण देकर भी अंगूर को पका सकते है |

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