सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना Sovereign Gold Bond Scheme 2022

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना Sovereign Gold Bond Scheme

सोने में निवेश के कई विकल्प होते हैं। जैसे – गहने, सोने के सिक्के, गोल्ड बुलियंस वगैरह। सोने में निवेश के 4 तरीके हैं, (सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, गोल्ड म्यूचुअल फंड , पेमेंट ऐप से भी खरीद सकते हैं गोल्ड और गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स ) | इनमें से एक मुख्य सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) भी है जिसके बारे में आज हम अपनी इस पोस्ट में बतायेंगे | सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2021-22 की नौंवी सीरीज (Sovereign Gold Bond Scheme 2021-22 Series 9) 10 जनवरी को खुल रही है।

Sovereign Gold Bond Scheme

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गोल्ड बॉन्ड की इस नई सीरीज के लिए 4,786 रुपये प्रति ग्राम का निर्गम मूल्य तय किया है। इसमें 14 जनवरी तक निवेश किया जा सकता है। ऑनलाइन आवेदन करने वाले और डिजिटल माध्यम से भुगतान करने वाले निवेशकों को 50 रुपये प्रति ग्राम की छूट दी जाएगी। इसका मतलब है कि ऐसे निवेशकों को यह बांड 4,736 रुपये प्रति ग्राम के भाव पर मिलेगा। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश के बारे में हमनें इस पोस्ट में विस्तार से बताया है |

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड से अभिप्राय

Sovereign Gold Bond :- सोने में निवेश के कई विकल्प होते हैं। जैसे – गहने, सोने के सिक्के, गोल्ड बुलियंस वगैरह। लेकिन इन सबमें सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड। इस सरकारी स्कीम में निवेश से रिस्क बेहद कम हो जाता है और आप बेफिक्र होकर रिटर्न हासिल कर सकती हैं। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को रिजर्व बैंक जारी करता है इसलिए इसकी शुद्धता को लेकर कोई झंझट नहीं होता। गोल्ड बॉन्ड पर आपको सालाना 2.50% ब्याज मिलता है। गोल्ड बॉन्ड के मैच्योर होने पर उस वक्त बाजार में सोने की जो कीमत होती है, उस पर आप बेच सकती हैं। इसकी खासियत ये है कि फिजिकल सोने की तरह इसके स्टोरेज की चिंता नहीं करनी पड़ती है।

सोने में निवेश के और भी कई विकल्प है :-

  1. गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (Gold ETF) :- सोने को शेयरों की तरह खरीदने की सुविधा को Gold ETF  कहते हैं। यह म्यूचुअल फंड की स्कीम है। ये एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड हैं जिन्हें स्टॉक एक्सचेंजों पर खरीदा और बेचा जा सकता है। चूंकि गोल्ड ईटीएफ का बेंचमार्क स्पॉट गोल्ड की कीमतें है, आप इसे सोने की वास्तविक कीमत के करीब खरीद सकती हैं। गोल्ड ईटीएफ खरीदने के लिए आपके पास एक ट्रेडिंग डीमैट खाता होना चाहिए। इसमें सोने की खरीद यूनिट में की जाती है। इसे बेचने पर आपको सोना नहीं बल्कि उस समय के बाजार मूल्य के बराबर राशि मिलती है।
  2. गोल्ड म्यूचुअल फंड :- गोल्ड म्यूचुअल फंड गोल्ड ETF का ही एक प्रकार है। ये ऐसी योजना है जिसके जरिए मुख्य रूप से गोल्ड ETF में ही निवेश किया जाता है। गोल्ड म्यूचुअल फंड सीधे भौतिक सोने में निवेश की योजना नहीं है। हालांकि उसी स्थिति को अप्रत्यक्ष रूप से लेते हैं। गोल्ड म्यूचुअल फंड ओपन-एंडेड निवेश प्रोडक्ट है, जो गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Gold ETF) में निवेश करते हैं और उसका नेट एसेट वैल्यू (NAV) ETFs के प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है।
  3. पेमेंट ऐप से भी खरीद सकते हैं गोल्ड :- अब आप अपने स्मार्टफोन से ही डिजिटल गोल्ड में निवेश कर सकती हैं। इसके लिए बहुत ज्यादा पैसा खर्च करने की भी जरूरत नहीं होती है। आप अपनी सुविधानुसार जितनी कीमत का चाहें, सोना खरीद सकती हैं। यहां तक कि 1 रुपए का भी। यह सुविधा अमेजन-पे, गूगल पे, पेटीएम, फोनपे और मोबिक्विक जैसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। डिजिटल गोल्ड खरीदने के कई फायदे हैं। आप 1 रुपए से भी निवेश की शुरुआत कर सकती हैं। इसके जरिए आप शुद्ध सोने में निवेश करती हैं। ज्वेलरी मेकिंग का खर्च नहीं आता है। इससे भी पैसों की बचत होती है। इसे फिजिकल गोल्ड की तरह सुरक्षित रखने के लिए परेशान नहीं होना पड़ता है।

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सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में न्यूनतम निवेश Sovereign Gold Bond Scheme

Minimum Investment in Sovereign Gold Bond Scheme :- इसमें पांच साल बाद अगले ब्याज भुगतान की तिथि पर बॉन्ड से निवेश निकालने का भी विकल्प होता है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की  अवधि आठ वर्षों की होती है। Sovereign Gold Bond में निवेशक को कम से कम एक ग्राम सोने के लिए निवेश करना होगा। कोई भी व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार अधिकतम चार किलो मूल्य तक का गोल्ड बॉन्ड खरीद सकता है। जबकि, ट्रस्ट और समान संस्थाओं के लिए खरीद की अधिकतम सीमा 20 किलो है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना की विशेषताएं

Features of Sovereign Gold Bond Scheme :- 

  • भौतिक सोने अपेक्षा बांड अधिक सुरक्षित विकल्प हैं |
  • बॉन्ड डीमैट और पेपर फॉर्म दोनों में उपलब्ध होंगे |
  • SGB ​​का उपयोग लोन के लिए सिक्योरिटी के रूप में किया जा सकता है। यह बांड भौतिक सोने की ही तरह है और पैसों जरूरत के समय इसे बेचा/ रिडीम किया जा सकता है।
  • सोने की वह मात्रा जिसके लिए निवेशक भुगतान करता है वह संरक्षित है, क्योंकि ग्राहक इसे बेचते/ रिडीम करते समय बाज़ार मूल्य प्राप्त करता है।
  • इन बॉन्ड को मैच्योर होने में 8 वर्ष का समय लगता है लेकीन इसे पाँच वर्ष बाद भी बेचा जा सकता है |
  • निवेश अवधि के अंत में सॉवरेन गोल्ड बांड रिडीम किए जाएंगे जिसका भुगतान प्रचलित सोने की कीमतों के अनुसार किया जाएगा।
  • इन बॉन्ड में शुद्धता और मेकिंग चार्ज जैसे कारक नहीं हैं जो कि सोने के आभूषणों के मामले में है।

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फिजिकल गोल्ड की तरह स्टोर करने का झंझट नहीं

No hassle of storing like physical gold :- सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, पेपर फॉर्म में होता है। इसलिए इसके साथ फिजिकल गोल्ड (Physical Gold) की तरह कहां स्टोर किया जाए कहां नहीं, ऐसी कोई दिक्कत नहीं है। आप बॉन्ड पेपर को संभालकर किसी फाइल में आसानी से सुरक्षित रख सकते हैं। बॉन्ड्स RBI (Reserve Bank of India) की बुक्स में दर्ज रहते हैं या डीमैट फॉर्म में रहते हैं। इसलिए स्क्रिप के नुकसान का जोखिम नहीं होता है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना में टैक्स की कैलकुलेशन

Calculation of Tax in Sovereign Gold Bond Scheme :-सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का ब्याज इनकम टैक्स एक्ट , 1961 के तहत टैक्सेबल है। एक वित्त वर्ष में गोल्ड बॉन्ड से हासिल ब्याज , गोल्ड बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज करदाता की अन्य स्रोत से इनकम में काउंट होता है। इसलिए इस पर टैक्स इस आधार पर लगता है कि करदाता किस इनकम टैक्स स्लैब में आता है। हालांकि गोल्ड बॉन्ड से हासिल ब्याज पर TDS नहीं है। Sovereign Gold Bond का मैच्योरिटी पीरियड 8 साल है। 8 साल पूरा होने के बाद ग्राहक को प्राप्त होने वाला रिटर्न पूरी तरह टैक्स फ्री है।

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मैच्योरिटी पीरियड से पहले निकालने पर कितना टैक्स

How much tax on withdrawal before maturity period :- सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड से दो तरीके से  समय से पहले बाहर निकला (Prematurely exit) जा सकता है। ऐसा करने पर बॉन्ड के रिटर्न पर अलग-अलग टैक्स रेट लागू हो जाते हैं :-

  1. आमतौर पर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का लॉक इन पीरियड 5 साल है। इस अवधि के पूरा होने के बाद और परिपक्वता अवधि (Maturity Period) पूरा होने से पहले गोल्ड बॉन्ड की बिक्री से आने वाला रिटर्न, Long Term Capital Gains में रखा जाता है। Long Term Capital Gains की दर Added Cess और Indexation Benefitsके साथ 20 फीसदी है।
  2. अगर Gold Bond , Stock Exchange List पर होते हैं तो इन्हें आरबीआई द्वारा नोटिफाई की गई तारीख से शेयर बाजार में ट्रेड किया जा सकता है। अगर गोल्ड बॉन्ड की बिक्री, खरीद की तारीख के 3 साल के अंदर की जाती है तो प्राप्त होने वाला रिटर्न Short Term Capital Gains माना जाएगा। यह निवेशक की सालाना आय में जुड़ेगा और Applicable Tax Slabs के मुताबिक टैक्स लगेगा। वहीं अगर गोल्ड बॉन्ड को खरीद की तारीख से 3 साल पूरे होने के बाद बेचा जाता है तो प्राप्त रिटर्न को Long Term Capital Gains में रखा जाएगा और एडेड सेस व इंडेक्सेशन बेनिफिट्स के साथ 20 फीसदी की दर से टैक्स लगेगा।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड कहां से खरीद सकते हैं Sovereign Gold Bond Scheme

Where to buy Sovereign Gold Bond :- इस गोल्ड बॉन्ड को खरीदने के लिए कुछ निर्धारित जगहें है जहाँ से आप इसे खरीद सकते है | सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सभी बैंकों,के माध्यम से बेचे जाते हैं। स्मॉल फाइनेंस बैंक (Small Finance Bank) और पेमेंट बैंकों (Payment Bank) को सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड बेचने की अनुमति नहीं होती है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड निम्न जगहों से भी खरीद सकते हैं :-

  1. Stock Holding Corporation of India Limited (SHCIL)
  2. नामित डाकघरों और मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों (Stock Exchanges)
  3. National Stock Exchange of India Limited (NSE)
  4. Bombay Stock Exchange Limited (BSE)

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ज्वैलरी की तरह मेकिंग चार्ज और जीएसटी नहीं

No making charges and GST like Jewelery :- चाहे कोई भी शॉप या शोरूम हो वहन पर जब हम गोल्ड आइटम लेते है या कोई आभूषण बनवाने के लिए देते है तो वे उसके साथ उसको बनाने के मेकिंग चार्ज को भी उसमें जोड़ देते है , साधारण शब्दों में जब गोल्ड ज्वैलरी खरीदते हैं तो मेकिंग चार्ज और जीएसटी (Goods and Services Tax) का भुगतान करना होता है लेकिन सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के साथ ऐसा नहीं है। इन पर न ही जीएसटी है और न ही मेकिंग चार्ज का झंझट। साथ ही फिजिकल गोल्ड (Physical Gold) के मामले में शुद्धता (Purity of Gold) पर भी ध्यान देना होता है, वह झंझट भी गोल्ड बॉन्ड में नहीं है।

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